स्वजाति प्रेम: love love

in story •  14 days ago

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स्वजाति प्रेम

एक वन में एक तपस्वी रहते थे। वे बहुत पहुंचे हुए ॠषि थे। उनका तपस्या बल बहुत ऊंचा था। रोज वह प्रातः आकर नदी में स्नान करते और नदी किनारे के एक पत्थर के ऊपर आसन जमाकर तपस्या करते थे। निकट ही उनकी कुटिया थी, जहां उनकी पत्नी भी रहती थी।
एक दिन एक विचित्र घटना घटी। अपनी तपस्या समाप्त करने के बाद ईश्वर को प्रणाम करके उन्होंने अपने हाथ खोले ही थे कि उनके हाथों में एक नन्ही-सी चुहीया आ गिरी। वास्तव में आकाश में एक चील पंजों में उस चुहिया को दबाए उडी जा रही थी और संयोगवश चुहिया पंजो से छुटकर गिर पडी थी। ॠषि ने मौत के भय से थर-थर कांपती चुहिया को देखा।

ठ्र्षि और उनकी पत्नी के कोई संतान नहीं थी। कई बार पत्नी संतान की इच्छा व्यक्त कर चुकी थी। ॠषि दिलासा देते रहते थे। ॠषि को पता था कि उनकी पत्नी के भागय में अपनी कोख से संतान को जन्म देकर मां बनने का सुख नहीं लिखा हैं। किस्मत का लिखा तो बदला नहीं जा सकता परन्तु अपने मुंह से यह सच्चाई बताकर वे पत्नी का दिल नहीं दुखाना चाहते थे। यह भी सोचते रहते कि किस उपाय से पत्नी के जीवन का यह अभाव दूर किया जाए।

ॠषि को नन्हीं चुहिया पर दया आ गई। उन्होंने अपनी आंखें बंदकर एक मंत्र पढा और अपनी तपस्या की शक्ति से चुहिया को मानव बच्ची बना दिया। वह उस बच्ची को हाथों में उठाए घर पहुंचे और अपनी पत्नी से बोले “सुभागे, तुम सदा संतान की कामना किया करती थी। समझ लो कि ईश्वर ने तुम्हारी प्रार्थना सुन ली और यह बच्ची भेज दी। इसे अपनी पुत्री समझकर इसका लालन-पालन करो।”

ॠषि पत्नी बच्ची को देखकर बहुत प्रसन्न हुउई। बच्ची को अपने हाथों में लेकर चूमने लगी “कितनी प्यारी बच्ची है। मेरी बच्ची ही तो हैं यह। इसे मैं पुत्री की तरह ही पालूंगी।”

इस प्रकार वह चुहिया मानव बच्ची बनकर ॠषि के परिवार में पलने लगी। ॠषि पत्नी सच्ची मां की भांति ही उसकी देखभाल करने लगी। उसने बच्ची का नाम कांता रखा। ॠषि भी कांता से पितावत स्नेह करने लगे। धीरे-धीरे वे यह भूल गए की उनकी पुत्री कभी चुहिया थी।

मां तो बच्ची के प्यार में खो गई। वह दिन-रात उसे खिलाने और उससे खेलने में लगी रहती। ॠषि अपनी पत्नी को ममता लुटाते देख प्रसन्न होते कि आखिर संतान न होने का उसे दुख नहीं रहा। ॠषि ने स्वयं भी उचित समय आने पर कांताअ को शिक्षा दी और सारी ज्ञान-विज्ञान की बातें सिखाई। समय पंख लगाकर उडने लगा। देखते ही देखते मां का प्रेम तथा ॠषि का स्नेह व शिक्षा प्राप्त करती कांता बढते-बढते सोलह वर्ष की सुंदर, सुशील व योग्य युवती बन गई। माता को बेटी के विवाह की चिंता सताने लगी। एक दिन उसने ॠषि से कह डाला “सुनो, अब हमारी कांता विवाह योग्य हो गई हैं। हमें उसके हाथ पीले कर देने चाहिए।”

तभी कांता वहां आ पहुंची। उसने अपने केशों में फूल गूंथ रखे थे। चेहरे पर यौवन दमक रहा था। ॠषि को लगा कि उनकी पत्नी ठीक कह रही हैं। उन्होंने धीरे से अपनी पत्नी के कान में कहा “मैं हमारी बिटिया के लिए अच्छे से अच्छा वर ढूंढ निकालूंगा।”

उन्होंने अपने तपोबल से सूर्यदेव का आवाहन किया। सूर्य ॠषि के सामने प्रकट हुए और बोले “प्रणाम मुनिश्री, कहिए आपने मुझे क्यों स्मरण किया? क्या आज्ञा हैं?”

ॠषि ने कांता की ओर इशारा करके कहा “यह मेरी बेटी हैं। सर्वगुण सुशील हैं। मैं चाहता हूं कि तुम इससे विवाह कर लो।”

तभी कांता बोली “तात, यह बहुत गर्म हैं। मेरी तो आंखें चुंधिया रही हैं। मैं इनसे विवाह कैसे करूं? न कभी इनके निकट जा पाऊंगी, न देख पाऊंगी।”

ॠषि ने कांता की पीठ थपथपाई और बोले “ठीक हैं। दूसरे और श्रेष्ठ वर देखते हैं।”

सूर्यदेव बोले “ॠषिवर, बादल मुझसे श्रेष्ठ हैं। वह मुझे भी ढक लेता हैं। उससे बात कीजिए।”

ॠषि के बुलाने पर बादल गरजते-लरजते और बिजलियां चमकाते प्रकट हुए। बादल को देखते ही कांता ने विरोध किया “तात, यह तो बहुत काले रंग का हैं। मेरा रंग गोरा हैं। हमारी जोडी नहीं जमेगी।”

ॠषि ने बादल से पूछा “तुम्ही बताओ कि तुमसे श्रेष्ठ कौन हैं?”

बादल ने उत्तर दिया “पवन। वह मुझे भी उडाकर ले जाता हैं। मैं तो उसी के इशारे पर चलता रहता हूं।”

ॠषि ने पवन का आवाहन किया। पवन देव प्रकट हुए तो ॠषि ने कांता से ही पूछा “पुत्री, तुम्हे यह वर पसंद हैं?”

कांता ने अपना सिर हिलाया “नहीं तात! यह बहुत चंचल हैं। एक जगह टिकेगा ही नहीं। इसके साथ गॄहस्थी कैसे जमेगी?”

ॠषि की पत्नी भी बोली “हम अपनी बेटी पवन देव को नहीं देंगे। दामाद कम से कम ऐसा तो होना चाहिए, जिसे हम अपनी आंख से देख सकें।”

ॠषि ने पवन देव से पूछा “तुम्ही बताओ कि तुमसे श्रेष्ठ कौन हैं?”

पवन देव बोले “ॠषिवर, पर्वत मुझसे भी श्रेष्ठ हैं। वह मेरा रास्ता रोक लेता हैं।”

ॠषि के बुलावे पर पर्वतराज प्रकट हुए और बोले “ॠषिवर, आपने मुझे क्यों याद किया?”

ऋषि ने सारी बात बताई । पर्बत्तराज ने कहा "'पूछ लीजिए कि आपकी कन्या क्री मैँ पसंद हूं वया?”

कांता बोली "’ओह ! यह तो पत्थर ही पत्थर हैं । इसका दिल भी पत्थर का होगा ।""

ऋषि ने पर्वतराज से उससे भी श्रेष्ठ वर बताने को कहा तो पर्बत्तराज बोले "'चूहाझ झरने भी श्रेष्ठ हें । वह मुझें भी छेदकर बिल बनाकर रहताहे ।""

पर्वत्तराज के ऐसा कहते ही एक चूहा उनके कानों से निकलकर सामने आ कूदा । चूहे को देखते ही कांता शी सै उछल पडी ३श्तात, ताता मुझे यह चूहा बहुत पसंद । मेरा विवाह इसी से कर दीजिए । मुझे इसके कान ओर पूंछ बहुत प्यारे लग रहे हैँ ।मुझे यही वर चाहिए ।""

ऋषि ने मंत्र बल से एक चुहिया को तो मानवी बना दिया, पर उसका दिल तो चुहिया का ही रहा। ऋषि ने कांता को फिर चुहिया बनाकर उसका विवाह चूहे से कर दिया ओर दोनों को विदा किया ।

सीख: जीव जिस योनी में जन्म लेता हैँ, उसी के संस्कार

बने रद्रतै दें । स्वभाव नकली उपायों से नदीं बदले जा सकते।

The English language translation With the help of Google translation tool as below

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Love love

An ascetic lived in a forest. They were very good friends. His austere force was too high. Every morning he came in the river and used to perform penance by depositing the asana on a stone in the river. His cottage was near, where his wife also lived.
One day a strange event happened. After finishing their penance, they had opened their hands by bowing down to God, that a small number of empty hands appeared in their hands. In fact, an eagle in the sky was blown up in the claws and it was accidentally falling apart from the clown paws. She saw the stranglehold clutches with fear of death.

Talshi and her wife had no children. Many times the wife had expressed the desire of the child. They were providing comfort. He knew that his wife had not written the pleasure of becoming a mother by giving birth to a child from her womb. Lists of luck can not be changed, but by telling them this truth they did not want to hurt the wife's heart. Thinking about which remedies to remove this lack of life of a wife.

She got pity on the other girl. He closed his eyes and read a mantra, and with the power of his penance, he made a chihaiya a human child. He reached the house in his hands and said to his wife, "You used to always wished for a child. Understand that God has listened to your prayers and sent it to the child. Think of it as your daughter. "

The wife was very happy to see the girl She took a child in her own hands and started kissing her "how lovely baby girl is. My baby is only this I will do it like a daughter. "

In this way, she became a chihiyahan child and started to become a member of the family. The wife started taking care of her like a true mother. He kept the baby girl named Kanta. She also started loving affection from Kanta. Gradually he forgot that his daughter had never stolen

Mother was lost in the love of the child He used to feed him and play with him day and night. If she was happy to see her husband laughing, she would not have been hurt to avoid having children. He himself taught Kanta to the proper time and taught all the knowledge of science. The timing started flying in the wings. Seeing the mother's love and affection and love for education, Kanta became an attractive, beautiful and capable woman for sixteen years. Mother started worrying about the daughter's marriage. One day she said to her, "Listen, now our time has become marriageable. We should make her hands yellow. "

Only then did Kanta arrive there. He used to wear flowers in his hair. Puberty was on the face. She felt that her wife was right. He slowly said in his wife's ear, "I will find out good for our daughter-in-law."

He appealed to the sun god from his instinct. The sun appeared in front of the sun and said, "Prasam Munishi, why do you remember me? What are the commandments? "

She said pointing to Kanta and said, "This is my daughter. Everything is comfortable I want you to marry him. "

That is why Kanta said, "Tam, it's very hot. My eyes are sticking to my eyes. How do I marry them? Neither will I go near them or see. "

She patted Kanta's back and said, "OK. Look at the second and the best. "

Suryudev says, "Kshishwar, the clouds are superior to me. He covers me too. Talk to him. "

On the call of the clouds, the clouds burst, the thunder and lightning flashed. On seeing the cloud, Kanta protested. "Tam, this is very dark. My colors are blond Our pair will not work. "

He asked Badal, "You tell me who is the best?"

Cloud answered "Wind. He flies me too. I keep on walking according to his warnings. "

She invited Pavan to Piwan. When Pawan Dev appeared, she asked Kanta only, "Daughter, do you like this bride?"

Kanta shook his head "No tata! It's very playful. Not only will it survive in one place. How will the greenhouse with it? "

Aishwarya's wife also said, "We will not give our daughter to Pawan Dev. My son-in-law should have at least this, which we can see with our eyes. "

She asked Pawan Dev, "You tell me who is the

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hey, Huma good to see u here. let's join together and make a strong network, to grow simultaneously. thank u

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Huma. Mirza:
Kya koi bta sakta Meri reputation 32 se 25 se kese ho gyi GoB steem community join krte hi plz btaiye

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