Ghazal

in #prameshtyagi8 years ago

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ग़ज़ल

कब तलक किसका है आबोदाना यहाँ
किसको अपना पता है ठिकाना यहाँ

चैन कितना भी छीने ये दुनिया मगर
छोड़ना मत कभी मुस्कुराना यहाँ

जन्म माँ-बाप से हम को मिलता मगर
ख़ुद हमें ही इसे है बनाना यहाँ

वक़्त सबसे बड़ा इसके आगे नहीं
कोई चलता किसी का बहाना यहाँ

आस अच्छी करो पर ज़रूरी नहीं
हर सफर ही हो रीता सुहाना यहाँ

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ग़ज़ल अच्छी है

dhanyabad sahab

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