एक शे'र

ग़ज़ल का अगला शेर ......

वो ज़ाहिरन जो बहुत हँसता खिलखिलाता था ,
उसे जो ग़ौर से देखा तो इक ख़ला निकला ।

                                                राकेश 'नादान'

ज़ाहिरन---प्रकटतया
ख़ला----निर्वातIMG_-pv37i2.jpg

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