एक शे'रrakeshnaadaan (46)in #prameshtyagi • 8 years ago ग़ज़ल का अगला शेर ...... वो ज़ाहिरन जो बहुत हँसता खिलखिलाता था , उसे जो ग़ौर से देखा तो इक ख़ला निकला । राकेश 'नादान' ज़ाहिरन---प्रकटतया ख़ला----निर्वात