सनम बेवफ़ा ,याद आने लगे हैं। भूलने में जिनको ,ज़माने लगे हैं।
सनम बेवफ़ा ,याद आने लगे हैं।
भूलने में जिनको ,ज़माने लगे हैं।
उठती न थी कभी ,नज़र जिनकी,
वो भी अब आँखें दिखाने लगे हैं।
वक़्त ने कितनी बदल दी दुनियाँ?
लोग अपने ही घर जलाने लगे हैं।
मुश्किल से हाथ आयी है,ज़िंदगी,
और इधर वो साँसें चुराने लगे हैं।
बदला सा है,मौसम शहर में उनके,
बादल कुछ इधर भी ,छाने लगे हैं।
तकियों पे न करना तकिया कभी,
जाने किस-२ के सिरहाने लगे हैं?
कुछ लोग कल पुल बना कर गये,
कुछ लोग आज पुल ढ़हाने लगे हैं।