जिस प्रकार एक माँ अपनी संतान को चाहे वो जैसी भी हो ,जिस भी रंग रूप हो ,उसे .........

in #poem4 years ago



जिस प्रकार एक माँ अपनी संतान को चाहे वो जैसी भी हो ,जिस भी रंग रूप हो ,उसे स्वीकार कर अपने हृदय से लगाती है ठीक उसी प्रकार हिंदी भी एक माँ की तरह विभिन्न भाषाओं को स्वीकार, अपना अपभ्रंश बना उन्हें स्वीकार करती है

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