'जब ख़ुद को भूल कर हम किसी को चुनते हैं तो अनजाने में ही ............

in #poem4 years ago



'जब ख़ुद को भूल कर हम किसी को चुनते हैं तो अनजाने में ही सही पर वेदनाएँ चुनते हैं, नदियों से उसकी चंचलता, समंदर से उसका खारापन सब ख़ुद में सिमटे नज़र आते हैं, ये सब हमें तब याद आता है जब बिन बताए एकदूजे से दूरियां बना चुके होते हैं और लहरों की तरह एक सफ़र के बाद अलग- किनारे पर खड़े होते हैं|

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