दूध छोड़, दया जोड़! अभियान के नारों को सुधारने के लिए सविनय आमंत्रण।

in #india8 years ago (edited)

प्यारे दोस्तों!

अगले माह जैन-धर्म का पावन चातुर्मास काल शुरू होने वाला है। जैसा कि आप जानते हैं कि मैं डेयरी उपभोग के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाने में गहन रुचि रखता हूँ। लेकिन मेरे प्रयास विशेषकर शाकाहारी वर्ग पर अधिक केन्द्रित रहते हैं और उसमें भी जैन धर्म के अनुयायी प्राथमिकता पर होते हैं।

अतः इस चातुर्मास काल में मैं अपने शहर में चातुर्मास स्थानों पर कुछ पुस्तिकाएं वितरित करने के साथ-साथ अनेक बैनर-पोस्टर लगाने की योजना भी बना रहा हूँ। अपने "दूध छोड़, दया जोड़" अभियान के अंतर्गत मैं इस बार अनेक नए नारों पर विचार कर रहा हूँ।

चूँकि मैं एक कवि नहीं हूँ और न ही प्रभावशाली संदेश लेखन में मेरी कोई विशेष दक्षता है, इसलिए मैं अपने द्वारा लिखे कुछ लघु संदेश-पंक्तियों को यहाँ प्रकाशित कर रहा हूँ। इनको बेहतर रूप से सम्पादित करने और कुछ और नए नारों का सुझाव देने के लिए, मैं आप जैसे प्रबुद्ध और प्रतिभाशाली लोगों से सहायता की गुजारिश करता हूँ।

निम्न पंक्तियों में से जो भी आपको अनुपयुक्त, निरर्थक या असम्मानजनक प्रतीत हो, मुझे अवश्य बेझिझक हो इंगित करें (ध्यान रहे कि ये जैन अनुयायियों को संबोधित करते हुए लिखी गई है):

  1. दूध छोड़ दया जोड़,
    पाप का यह बंधन तोड़!

  2. एकेंद्रीय आलू-कांदा से है परहेज?
    लेकिन पंचेन्द्रीय गौ-दूध से नहीं गुरेज़?
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  3. एकेन्द्रीय आलू खाने में महा-पाप?
    फिर पंचेन्द्रीय गौ-दूध का क्या माप!
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  4. वनस्पतिकाय जमींकंद खाना सरासर गलत!
    फिर त्रसकाय के दूध की ये कैसी लत?
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  5. आप जानवरों का माँस-अंडा नहीं खाते?
    तो उनका दूध कैसे आप डकार जाते?
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  6. क्या मैं एक शाकाहारी हूँ?
    मैं माँस-मच्छी-अंडा कुछ भी नहीं खाता,
    लेकिन चमड़ा, ऊनी और रेशमी-वस्त्र पहनता।
    गाय-भैंस-बकरी का दूध भी चाव से पीता,
    फिर भी पूर्ण शाकाहारी कहलाता!
    क्या कुछ समझ है आता?
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  7. तीर्थंकरों को दोष न देना,
    दूध का व्यापार न करना!
    अचौर्य और अहिंसा के पालक,
    नहीं हो सकते पर-दूध भक्षक!
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  8. पशुओं का दूध, चमड़ा और माँस
    त्याग व विरोध हो इनका, हरेक साँस!
    तीनों हिंसक असुरों का हो सर्व-नाश
    अहिंसक जैन धर्म का गूंजे जय-घोष
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  9. गाय के दूध पर उसके बछड़े का ही है हक़
    हर माँ का दूध उसके बच्चे के लिए है, बेशक!
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  10. किसी बच्चे का हक़ न छीनो,
    किसी माँ का ममत्व न छीनो!
    पशु-दूध छोड़ो और दाल-गेहूँ बीनो,
    शाक खाओ और असल शाकाहारी बनो!
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  11. पशु-दूध की यह कैसी प्यास?
    गौ और बछड़ा दोनों उदास!
    दूध-दुहने, गौ माता को बनाया तूने दास
    भूख से तड़पते, उसी के बछड़े के पास
    उसकी दो बूँद दूध की वो आस
    क्या होगी तुझको कभी आभास?
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  12. क्या आप कभी बड़े होंगे?
    या आजीवन पर-दूध पियेंगे?
    सदा दूध-पीते बच्चे ही रहेंगे?
    ये चोरी-चकारी कब छोड़ेंगे???
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  13. जय-जिनेन्द्र! अहिंसा और आस्था के केंद्र!
    मुझसे चाय-दूध न पूछ, हे धर्मेंद्र!
    आतिथ्य-सत्कार में किसी प्राणी को हो कष्ट,
    तो मेजबान ही कहलायेगा अजैन और दुष्ट!
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  14. सिर्फ जय-जिनेंद्र ही बोलोगे प्यारे!
    या दुग्ध-पान को करोगे किनारे?
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  15. हे प्रभु! अगले पर्याय में इंसान को गाय बनाना,
    उसे हिंसा और अहिंसा का अंतर है समझाना!
    - गौ-माता की करूण पुकार
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  16. दूध की हवस:
    मैं जबरन माँ बनी, तेरी दूध की हवस के खातिर!
    मेरा पीड़ा-पूर्ण प्रसव हुआ, तेरी दूध की हवस के खातिर!
    मेरा बछड़ा भूखा रहा, तेरी दूध की हवस के खातिर!
    मेरा दुलारा काटा गया, तेरी दूध की हवस के खातिर!
    उसका चमड़ा उतारा गया, तेरी दूध की हवस के खातिर!
    उसका माँस बेचा गया, तेरी दूध की हवस के खातिर!
    मैं आजीवन बंधी रही, तेरी दूध की हवस के खातिर!
    अब मैं भी बूचडखाने जाउंगी, तेरी दूध की हवस के खातिर!
    अगर इंसानियत जागे तेरी, तो मचा शोर:
    दूध छोड़, दया जोड़

  17. क्या आप किसी की माँ का दूध खरीदते हैं?
    किसी प्राणी के दूध का व्यापार करते हैं?
    फिर अहिंसा परमो-धरम का उदाहरण देते हैं?
    और अपने आपको जैन कहते हैं!!!
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  18. मेरा बछड़ा, मेरा दूध,
    तू बीच में मत कूद!
    कितना कम है कितना ज्यादा,
    ये मेरा औरे मेरे बछड़े का मसौदा।
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  19. कुल कितने मेरे थन है,
    गिनने में तुझे कोई शर्म है?
    मुझे माँ कह, मेरे गुप्तांग निहारे?
    हे धर्मात्मा! ऐसे तेरे कर्म है?
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  20. क्या दूध पिया है अपनी माँ का तूने?
    किसी और को दिया है कभी उसे छूने?
    अरे, दूसरों की माँ का दूध पीने वाले,
    अपनी माँ की इज्जत पर थोडा रहम खा ले!
    पर-दूध पर जबरन हक़ जताने वाले,
    क्या ताकत नहीं थी खुद की माँ के दूध में?
    !!दूध छोड़, दया जोड़!!

  • अगर आपको इनमें से कोई भी पंक्तियाँ प्रभावशाली लगा हो, तो उनके क्रमांक कमेन्ट में लिख कर मुझे ज़रूर बताएं।
  • यदि आपको कोई त्रुटी या फिर अशोभनीय शब्द नज़र आये हों, तो उसका भी क्रमांक सहित सन्दर्भ दे विस्तार से अपनी टिप्पणी लिखें।
  • इसी तर्ज पर आप कुछ और अच्छे नारों का सुझाव दे पायें तो मैं आपका आभारी रहूँगा।


    आपका इस विषय पर ध्यान देने के लिए मेरा कोटि-कोटि धन्यवाद!

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All quotes are awesome but i like most 2, 4, 5, 6, 7, 10, 14, 15, 16 and 18.

Thanks for picking out these. I have written a few more after posting this, but I think this should be sufficient to make a start.

कौन कहता आप कवि नहीं? आप तो गज़ब की तुकबंदी करते हैं।
यह अन्याय होगा अगर इतने बेहतरीन नारों में से कुछ का चयन करना हो। हर नारा अलग अलग सोच के व्यक्तियों के हिसाब से अच्छा है। न 4,5,12,18 जबरदस्त है।

उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद! बाकी, अगर यह संदेश लोग समझ सकें और यह पंक्तियां उनकी जबान पर चढ़ जाएं, वहीं सफलता का उचित पैमाना होगी।

अपनी पसंद बताने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। निश्चित ही यह अंतिम निर्णय लेने में मददगार होगी।

Yeah sare post to sach much Kamaal Ki Hai...⏫⏬⏩◀🔴🔵🔲🌠🌠⚪◻🔳🔽........gajab

Aap sachmuch Kamal ke ho.

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अापकी सोच और भावना तो अच्छी हैं पर इस तरह दूध को छोड़ देना अपने पैर पर कुलहाड़ी मारने के बराबर हैं।
हम कुछ भी कर ले पर यह एक सच्चाई हैं कि मनुष्य स्वार्थी होता हैं और जब तक किसी की उपयोगिता को नहीं देखता तब तक, एक तरह से कहे उसका कोई सम्मान नहीं करता।

हमारे हिंदू समाज में जब तक बैलो की उपयोगिता थी तब तक वो घरो में थे और जिस दिन इंजन का आविष्कार हुआ उस दिन बैलों-नंदियो की उपयोगिता खत्म हो गई और फिर हुआ क्या??
एक इंजन आता और एक नंदी कत्लखाने में!!

अगर गौपालको को किसी तरह इसका ज्ञान दिया जाय कि दो आंचल से ज्यादा का दूध नहीं लेना और बछड़ा जितना दूध पता है पीने दो।अब तो गौबर के कंड़े आनलाइन भी बिकते हैं ।

धन्यवाद!

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