भगवान कभी किसी से यह नहीं कहते कि तुम मेरी पूजा करो तभी आशीर्वाद मिलेगा व्यक्ति तो भगवान को स्वयं अपनी इच्छा से पूजने जाता है।
सम्मान उमरदराज होने से मिलेगा यह जरूरी नहीं सम्मान छीन कर भी नहीं लिया जा सकता है सम्मान पाने के लिए सम्माननीय होने लायक काम भी करना चाहिए।
