सानन्दमानन्दवने वसन्त- मानन्दकन्दं।
हतपापवृन्दम् ।
वाराणसीनाथमनाथनाथं श्री विश्वनाथं शरणं प्रपद्ये ।।
जो स्वयं आनन्दकन्द हैं और आनन्दपूर्वक आनन्दवन (काशी क्षेत्र) में वास करते हैं,
जो पापसमूहके नाश करने वाले हैं,
उन अनाथोंके नाथ काशीपती श्री विश्वनाथ की शरणमें मैं जाता हूं।
