आत्मा तो हमेशा यह जानती है क्या सही था क्या ग़लत था मुश्किल तो मन को मनाकर तैयार करने की है इस जद्दोजहद में मन जीत गया तो आत्मा हार जाती है आत्मा जीत जाए तो मन असंतुष्ट रह जाता है। स्थिति कुछ भी हो दोनों ही परिस्थितियों में लड़ना तो अपने आप से ही तय है।
