Ghazal
ग़ज़ल
कब तलक किसका है आबोदाना यहाँ
किसको अपना पता है ठिकाना यहाँ
चैन कितना भी छीने ये दुनिया मगर
छोड़ना मत कभी मुस्कुराना यहाँ
जन्म माँ-बाप से हम को मिलता मगर
ख़ुद हमें ही इसे है बनाना यहाँ
वक़्त सबसे बड़ा इसके आगे नहीं
कोई चलता किसी का बहाना यहाँ
आस अच्छी करो पर ज़रूरी नहीं
हर सफर ही हो रीता सुहाना यहाँ

ग़ज़ल अच्छी है
dhanyabad sahab