हम सबका एक ही रखवाला है।

in LAKSHMI6 years ago

कहानी हमेशा बहुत कुछ सीखती है। वह निर्भर हमारे विचारो पर करती है। बात उन दिनों की है, जब लोग एक देश से दूसरे देश की यात्रा समुद्री मार्गों से करते थे। यात्रा लंबी करनी होती थी, इसलिए बीच-बीच में किसी समुद्री तट पर आराम और जलपान करने के लिए लोग रुका करते थे। ऐसी ही एक यात्रा के दौरान किसी समुद्री तट पर बने में यात्री और नाविक आराम के लिए रुके थे। वे यात्री अलग अलग देशों के निवासी थे। कुछ यात्री जलपान कर रहे थे। तभी अचानक एक विदेशी यात्री ने अन्य यात्रियों से पूछा, "भाइयो! क्या आप में से कोई बता सकता है कि हम सबका रखवाला कौन है? "प्रश्न सुनकर एक अफ्रीकी यात्री ने झट से म्यान से तलवार निकालते हुए कहा है मेरा रखवाला। यह हर समय मेरी रक्षा करता है ।

"" यह रखवाला है। हमारे सुख-दुःख में वही हमारे साथ रहता है। "अफ्रीकी यात्री के इस उत्तर ने कॉफ़ी हाउस में उपस्थित सभी लोगों को चौंका दिया। उनमें से एक भारतीय युवक ने कहा, “केवल ईश्वर ही सच्चा है वही हम सबका एक अंग्रेज यात्री ने जोर देकर कहा, “हमारा रखवाला तो प्रभु ईश्वर है । वही हमारी सभी गलतियों को माफ़ करता है। "एक अरबी यात्री ने सबकी बातों को काटते हुए कहा, “एक अल्लाह ही है, जो सच्चा रखवाला है।" इस प्रकार हर यात्री ने अपनी-अपनी राय दी । एक चीनी यात्री कॉफी, हाउस के एक कोने में बैठा सबकी बातें चुपचाप सुन रहा था। जब लोगों की दृष्टि उस पर पड़ी, तो सबने उससे कहा कि वह भी इस विषय पर अपने विचार बताए। उसने शांत स्वर में कहा, "भाइयो, इससे पहले कि मैं अपने विचार बताऊँ, मैं एक घटना सुनाता हूँ। वह घटना इस प्रकार है एक बार मैं इंग्लैंड के एक जहाज़ में यात्रा कर रहा था । यह जहाज़ दुनिया का चक्कर काटकर यहाँ आया था। यात्रा के मध्य में हम सब एक समुद्र-तट पर रुके । हममें से कुछ यात्री जहाज़ से उतरकर समुद्र के किनारे नारियल के पेड़ों के नीचे आकर लेट गये।

आदमी यह जानना चाहता था कि सूरज की रोशनी क्या है ? यह जानने के लिए वह गए। जैसे ही हम नारियल के पेड़ों के नीचे आराम से लेटे, एक अंधा आदमी हमार पास आया। बाद में हमें पता चला कि वह आदमी अंधा कैसे हो गया। वास्तव में वह घंटों सूरज की ओर देखता रहा। फलस्वरूप, वह अपनी आँखों से हमेशा के लिए हाथ धो बैठा। उस अंधे आदमी के साथ उसका एक सेवक भी था, जिसने उसे नारियल के पेड़ों की छाया में बिठाकर एक नारियल तोड़ा। उसके बारीक रेशों की एक बत्ती बनाई और फिर उसे नारियल के तेल में भिगोया। सेवक अंधे आदमी को समीप में ही एक झोंपड़ी में ले गया और उसे अपनी टूटी हुई चारपाई पर बिठाकर बत्ती जलाई और बोला, “मैं यह तो नहीं जानता कि सूरज क्या है क्योंकि इस पर विचार करना मेरा काम नहीं है। मैं तो केवल इतना जानता हूँ कि रोशनी क्या है। इस झोंपड़ी के अँधेरे को खत्म करने के लिए मैंने एक दीपक जलाया है, जिससे मैं झोंपड़ी में रखी हुई हर चीज़ देख सकता हूँ यही है मेरा सूरज। "एक लँगड़ा आदमी छड़ी का सहारा लिए उस झोंपड़ी के सामने से गुजर रहा था।

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उसने सेवक की बात सुनी, तो वह खिलखिलाकर हंस पड़ा हैसी की आवाज सुनकर वह अंधा आदमी और सेवक झोंपड़ी से बाहर आ गए। उन्हें देखकर लंगडे आदमी ने उनसे कहा, "तुम इतना भी नहीं जानते कि सूरज क्या है - आओ, तुम्हें बताता कि सूरज क्या है। सूरज आग का एक गोला है, जो प्रतिदिन सबेरे पहाड़ी से निकलता है और शाम को दूर पहाड़ों में ही छिप जाता है। मैं तो हमेशा से यही देखता आया मित्र की ओर इशारा करते हुए कहा, "मेरा यह मित्र आपको सही ढंग से समझा सकता उसके मित्र ने कहा, “वास्तव में सूरज पृथ्वी के चारों ओर चक्कर नहीं लगाता बल्कि पृथ्वी सूरज के चारों ओर चक्कर लगाती है । सूरज के चारों ओर एक चक्कर लगाने में भी एक भारतीय यात्री ने उसे टोका, “आप सभी बेकार की बातें कर रहे हैं । सूरज तो एक देवता हैं जो हमें अंधकार से प्रकाश में ले जाते हैं। "भारतीय यात्री की यह विचित्र बात सुनकर हमारे जहाज के नाविक ने कहा नहीं , आप बिल्कुल गलत कह रहे हैं । सूरज एक देवता नहीं है । मैंने अनगिनत समुद्री यात्राएँ की हैं । मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि सूरज पूरब में जापान के द्वीपों से निकलता है और इंग्लैंड के आसपास के द्वीपों में कहीं छिप जाता है । मेरे दादा जी भी नाविक का तर्क सुनकर एक अंग्रेज़ यात्री को जोश आ गया। उसने कहा, "किसी भी देश के नागरिक सूरज के बारे में उतना नहीं जानते, जितना कि इंग्लैंड के लोग जानते हैं। इंग्लैंड का बच्चा-बच्चा बता सकता है कि सूरज न तो कहीं से निकलता है और न ही कहीं छिपता है यह तो हमेशा से पृथ्वी के चक्कर लगा रहा है और लगाता रहेगा । "उस अंग्रेज़ ने एक छोटी-सी लकड़ी की डंडी से रेत पर एक निशान बनाकर उन्हें समझाने की चेष्टा की कि सूरज किस प्रकार पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है , लेकिन वह इस सिद्धांत को भली-भाँति समझा नहीं सका । इसलिए उसने अपने एक यही कहा करते थे । "

पृथ्वी को चौबीस घंटे का समय लगता है । सूरज इस दुनिया को ही रोशनी नहीं देता, बल्कि चंद्रमा, जो रात में अपनी छटा बिखेरता है, को भी अपनी रोशनी देता है । " इस घटना का वर्णन करने के उपरांत चीनी नागरिक ने कहा, " जिस प्रकार हम सूरज के बारे में गलत सोचते आए हैं, बिल्कुल उसी प्रकार लोग ईश्वर को भी ठीक प्रकार से समझ नहीं पाए हैं । लोग धार्मिक मामलों पर संकुचित दृष्टि से विचार करते हैं और धर्म की बातों पर सांप्रदायिक झगड़े कराने से भी पीछे नहीं हटते। हर आदमी मानता है कि उसका ईश्वर अलग है, जो उसके उपासना-गृह में वास करता है । लेकिन वास्तविकता है कि ईश्वर इतना बड़ा है कि उसे किसी भी उपासना गृह में बंद नहीं किया जा सकता । इतना ही नहीं हमारी यह दुनिया भी ईश्वर की ही है । ईश्वर चाहता है कि सब लोग इसे अपना मिला-जुला घर समझें और इसमें मिल जुलकर रहे, एक-दूसरे से प्रेम और मधुर व्यवहार करना सीखें । " चीनी यात्री की बात सुनकर कॉफ़ी हाउस में उपस्थित सब लोग खामोश हो गए और फिर उनमें इस बात पर बहस नहीं हुई कि किसका विश्वास सही है और किसका गलत। हाँ, सबके चेहरे से ऐसा प्रतीत हो रहा था। कि सबको कुछ न कुछ जानकारी मिल गई है।

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