गुरु से अपना अज्ञान छिपाना वैसा ही है ...............
गुरु से अपना अज्ञान छिपाना वैसा ही है जैसे कि किसी वैद्य से अपनी किसी भयावह बीमारी की छिपाना|'."
गुरु से अपना अज्ञान छिपाना वैसा ही है जैसे कि किसी वैद्य से अपनी किसी भयावह बीमारी की छिपाना|'."