महिलायें चालीस की आयु में क्या खायें
महिलाओं के 40 की आयु में दाखिल होने के बाद, शरीर की चयापचय दर कम हो जाती है। परिणामतः, शरीर में वसा जमा होने लगती है, जिससे मोटापा होता है। यही वह समय है, जब हॄदय की समस्यायें जैसे उच्च रक्तदाब, मधुमेह, रक्तक्षय तथा अन्य बीमारियों का निदान होता है।
साथ ही, चालीस की उम्र की महिलाओं को जल्द ही मेनोपॉस होनेवाला होता है। शरीर के हार्मोन अस्थिर हो जाते हैं तथा शरीर में कई भौतिक तथा मनोवैज्ञानिक परिवर्तन होने लगते हैं।
एक बहुत पुरानी कहावत है, जिसके अनुसार स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है। कमज़ोर मानसिक स्वास्थ्य के कारण सरदर्द, अपच तथा एकाग्रता का अभाव होता है। शरीर कमज़ोर हो जाता है, तथा कमज़ोरी से गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। इससे अमाश्य तथा पेट में दर्द और कब्ज़ जैसी असुविधायें होती हैं।
इन समस्याओं के कारण लोगबाग आम तौर पर डॉक्टर के पास जाकर कई पैसे व्यर्थ करते हैं। पर हमें समझना चाहिये कि निवारण उपचार से बेहतर होता है। ऊपर दी गई सभी समस्याओं का उपचार आपके रसोईघर में मौजूद है।
प्रत्येक महिला को मालूम होना चाहिये कि पोषक आहार कौनसा है। स्वस्थ तथा समतुल्य अन्न का सेवन परिवार को प्रसन्न रखता है। आपके रोज़ के आहार में विविध अनाज, दालें, हरी पत्तीदार सब्ज़ियां, फल तथा दूध के पदार्थ, अण्डे, मटन तथा मछली होने चाहियें।
चालीस की उम्र के आसपास महिला को तेल और शक्कर सभी खाद्य पदार्थों में कम मात्रा में लेने चाहियें। समतोल आहार का सेवन करने से आपके शरीर को सभी पोषक तत्त्व, प्रोटीन, कार्बोद, खनिज तथा रेशेदार पदार्थ प्राप्त होंगे।
40 के बाद, कैल्शियम, लौहतत्त्व तथा प्रोटीन का सेवन बढ़ना चाहिये, क्योंकि उस समय फ़ॉलिक एसिड की अधिक आवश्यकता होती है। पर्याप्त कैल्शियम के अभाव में हड्डियां खोखली हो जाती हैं।
हड्डियां कमज़ोर होने से थोड़ा सा गिरने से ही अस्थिभंग हो सकता है। दूध, छाछ, दूध के पदार्थ, चीज़, हरी सब्ज़ियां, रागी, सूखे मेवे, अण्डे, पोपी बीज, सीसम के बीज, फलियां, सौंफ, कड़ीपत्ता, बदाम आदि आहार में शामिल होने चाहियें।
सोयाबीन, गाज़र, सहिजन की पत्तियां आदि आहार में शामिल होनी चाहियें। विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण के लिये आवश्यक हैं। इसीलिये सुबह की गुनगुनी धूप में बैठें, अण्डे, मछली तथा दूध के पदार्थ खायें। यह शरीर को सम्भावित रोगों से सुरक्षित रखता है।
रोगों के ख़तरे को कम करने तथा आहार में लौहतत्त्व को बढ़ाने के लिये, फॉलिक एसिड से सम्पन्न पदार्थ खायें ताकि हॄदयरोग तथा कर्करोग की सम्भावना कम रहे। हरी पत्तीदार सब्ज़ियां, फल, दालें, खजूर, गुड़, मूंगफली, फूलगोभी, कन्दमूल, दालचीनी, चुकन्दर, गाजर, ज्वारी, बाजरा, सोयाबीन, सूखे मेवे, मछली तथा मटन आहार में शामिल होने चाहिये। लौहतत्त्व के अवशोषण के लिये विटामिन सी की ज़रूरत होती है। इसलिये, दैनिक आहार में खट्टे फल जैसे कि नींबू, सन्तरा और आंवला खायें।
विटामिन बी रक्तसंचार तथा मस्तिष्क के कार्य के लिये आवश्यक है। इसकी कमी से त्वचा पीली पड़ जाती है। साथ ही कमज़ोरी, थकावट, सांस में परेशानी, परेशानी के दौरे हो सकते हैं। अण्डे, मटन, मछली तथा दूध के पदार्थ खायें।
आजकल, पेट की समस्यायें बढ़ गई हैं इसीलिये आपके खाने में सलाद, फल, सब्ज़ियां, अनाज, चना दाल और मेथी के द्वारा रेशे की मात्रा बढ़नी चाहिये।। रोज़ 6 से 8 ग्लास पानी पियें। सुबह 30 से 40 मिनट व्यायाम करें।साथ ही आपके दैनिक आहार का विभाजन इस प्रकार करें कि आप रोज़ चार बार खा सकें।
प्रोटीन वसारहित मटन, मछली, चिकन, अण्डे, दालें( मटर, छीमी, दालें) तथा तिलहन, दूध और दूध के उत्पादों से प्राप्त होता है। इससे आपके शरीर में नई कोशिकायें बनती हैं।ओमेगा3, ओमेगा 6 वसायुक्त आम्ल, मछली, काजू, जैतून तेल, अरारोट आपको हृदयरोग से बचाते हैं।
स्वस्थ आहार से मन को शान्ति मिलती है। खाने की स्वस्थ आदतों से महिला रोगमुक्त जीवन बिता सकती है।