मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ तू किसी रेल सी गुज़रती है............rekhepal (45)in #poem • 4 years ago मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ तू किसी रेल सी गुज़रती है मै किसी पुल सा थरथराता हर तरफ़ एतराज़ होता है मैं अगर रौशनी में आता हूँ