जो ज़बान का सच्चा नहीं, उससे रिश्ता নিभানे की उम्मीद करना फ़िजूल है जैसे पत्थर पर सिर पीटकर थक जाओ पर वो पत्थर है पत्थर ही रहेगा पर फ़रेबी और पत्थर में यही अंतर है पत्थर जैसा दिखता वैसा ही होता है ©नेहा यादव ०३.०२.२०२२ और फ़रेबी लोग ऊपर से कुछ और भीतर से कुछ और होते हैं|'."