Ghazal
ग़ज़ल
दिल से दिल का, करार होना हैै
लाजिमी है, कि प्यार होना है
गुलबदन गुल, वफ़ा के जूडे़ में
गूँथ लेना मयार होना है
यूँ न छेडो़, नदी है, चंचल भी
कश्तियों पर, सवार होना है
बिजलियाँ बेसबब नहीं कड़कीं
अंजुमन, खु़श-गवार होना है
एक सिक्का, है ज़िंदगी बेवा
ग़म-ख़ुशी, जीत-हार होना है
पीठ पर घाव वक़्त के कैसा
दर्द अब बेशुमार होना है
आबरू, है कहाँ हिफ़ाज़त में
जुस्तजू तार - तार होना है
मजहबी रोटियाँ, सियासत की
बच्चा - बच्चा फ़िगार होना है
रोकिए गै़ब नफ़रतें वरना
मुल्क को शर्मसार होना है