Ghazal

in #prameshtyagi8 years ago

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ग़ज़ल

दिल से दिल का, करार होना हैै
लाजिमी है, कि प्यार होना है

गुलबदन गुल, वफ़ा के जूडे़ में
गूँथ लेना मयार होना है

यूँ न छेडो़, नदी है, चंचल भी
कश्तियों पर, सवार होना है

बिजलियाँ बेसबब नहीं कड़कीं
अंजुमन, खु़श-गवार होना है

एक सिक्का, है ज़िंदगी बेवा
ग़म-ख़ुशी, जीत-हार होना है

पीठ पर घाव वक़्त के कैसा
दर्द अब बेशुमार होना है

आबरू, है कहाँ हिफ़ाज़त में
जुस्तजू तार - तार होना है

मजहबी रोटियाँ, सियासत की
बच्चा - बच्चा फ़िगार होना है

रोकिए गै़ब नफ़रतें वरना
मुल्क को शर्मसार होना है

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