Ghazal
ख्वाब में ही बस खुशी की दीद है,
जिन्दगी इक ख़ुशनुमा उम्मीद है
टूटे-फूटे कुछ दिये ही बस नसीब,
अपनी किस्मत में कहां ख़ुर्शीद है
मौत से मिलकर ही सब ग़म होंगें दूर,
बस यही अब आखिरी उम्मीद है
ज़ेब में पैसे न दिल में कोई लुत्फ,
कैसे कह दूँ , आज रोजे - ईद है
जाने कब कैसे बदल जाए नसीब,
क्यूँ 'रिशू' इतना तू ना-उम्मीद है
Beautiful photography
Thanks