भगवान की इच्छा ना हो तो सामने पड़ा हुआ खजाना भी दिखाई नहीं देता !!! A Beautiful Story
भगवान अगर चाहे तो राजा को भिखारी और भिखारी को बोहोत बड़ा राजा बना सकता है , भगवान् की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता , अगर भगवान् देना चाहे तो वो इंसान को पलों में अमीर बना सकता है , परन्तु वहीँ अगर भगवान् ना देना चाहे तो सामने पड़ा हुआ खजाना भी दिखाई नहीं पड़ता , यह कहानी दो भिखारियों की है , जो एक राजा के दरबार में रोज़ भीख मांगने जाय करते थे , एक का नाम धानु था और दूसरे भिखारी का नाम शानू था , राजा ने ही यह नाम उन भिखारियों के रखे थे ,
राजा जब उन दोनों भिखारियों को दान देता तो धानु तो राजा का शुक्रिया करता लेकिन शानू परमात्मा का शुक्रिया करता , यह बात राजा को अच्छी नहीं लगती थी , राजा ने एक दिन शानू को कह दिया के दान मैं तुम्हे देता हु तो तुम भगवान् का शुक्रिया मत किया करो लेकिन शानू हसने लग जाता और फिरसे भगवान् का शुक्रिया करता , अब राजा ने शानू को सबक सिखाने का फैंसला कर लिया , राजा सोचने लगा के अगर मैं धानु को अमीर बना दूँ तो शानू को कह सकूंगा के देखो धानु मेरा शुक्रिया करता था और अब उसे मांगने की जरुरत नहीं है और तुम भगवान् का शुक्रिया करते थे और तुम अब भी भीख मांग रहे हो , राजा मन में एक तरकीब लगाता है , और योजना बनाता है
अगले दिन राजा के पास जब दोनों भिखारी आते हैं तो वो उन्हें कहता है के मैं आज से तुम्हे ज्यादा दान दिया करूँगा , यह सुनते ही धानु राजा की जय जय कार करने लगता है और शानू परमात्मा की , राजा शानू को कहते है शानू आज तुम भोजन करके जाओ और धानु को कहते है के तुम अभी चले जाओ , क्यूंकि राजा ने रास्ते में चांदी का थाल रखवाया होता है , राजा चाहते हैं के वो थाल धानु को मिले , इसलिए राजा ने शानू को खाना खिलाने के बहाने रोक लिया , लेकिन भगवान् को कुछ और ही मंजूर था , धानु मजे से जा रहा होता है , लेकिन रास्ते में सोचता है मैं भिखारी हूँ क्यों ना आज अँधा भिखारी बनने की एक्टिंग की जाए और वो दोनों आँखे बंद करके चलने लग जाता है , और चांदी से भरा थाल पीछे रह जाता है , आँखे बंद hone के कारण धानु को वो थाल नहीं दीखता , फिर खाना खाने के बाद जब शानू आता है तो चांदी से भरा थाल देख खुश हो जाता है और सोचता है के यह थाल धानु को क्यों नहीं दिखा , जरूर भगवान् ने ही उसके लिए रखा है ,
अगले दिन राजा को लगता है आज धानु बोहोत खुश होगा क्यूंकि उसे चांदी से भरा थाल मिल गया होगा , लेकिन जब वो दोनों आते हैं तो राजा धानु से पूछते हैं कल का सफर कैसा था , धानु कहता है अच्छा था राजन , आपने जो दान दिया था उसे मेरे बच्चो और मेरी पत्नी ने खाया , राजा सोचने लगता है के इसने चांदी के बारे में तो कहा ही नहीं , राजा धानु से पूछते है के कल तुम रास्ते मे से गए थे तो क्या तुम्हे कुछ मिला था , धानु कहता है जी नहीं मुझे तो कुछ नहीं मिला , राजा सोचता है के शायद धानु झूठ बोल रहा है , खैर राजा आज यह सोचता है के रास्ते में रखने की बजाये आज धानु को हाथ में ही खजाना पकड़ा देता हूँ , वो धानु को एक तरबूज देता है वो तरबूज के अंदर हीरे जवाहरात भरे पड़े होते है , धानु यह देख दुखी हो जाता है , राजा शानू को वैसा ही दान देता है जैसा वो रोज़ देता है , धानु रास्ते में सोचता है के मैं इस तरबूज का क्या करूँगा क्यों न इसे मैं तरबूज की दूकान में दे दूँ , इसके बदले मुझे कुछ पैसे तो मिल जाएंगे , और वो वह तरबूज दूकान में दे देता है , लेकिन शानू जाते जाते सोचता है के क्यों ना घरवालों के लिए तरबूज ले जाऊ और वो वही तरबूज ले जाता है जिसमे हीरे जवाहरात थे , जब शानू घर जाता है तो तरबूज खाने के लिए खोलता है , और उसमे से हीरे जवाहरात देख के हैरान हो जाता है और भगवान् का शुक्रिया करता है , अगले दिन अकेला धानु ही दान लेने के लिए आता है , यह देख राजा फिरसे चकित रह जाता है और शानू को पूछता है , के उसने तरबूज का क्या किया तो शानू कहता है के खा लिया , क्यूंकि अगर वो यह कहता के उसने वो बेच दिया है तो राजा उसे दंड देंगे।
राजा सब समझ जाता है के कोई चक्कर है , राजा शानू के घर जाता है , और उससे दान ना लेने का कारण पूछता है , तो शानू बताता है के भगवान् ने उसे अब इतना दे दिया है , के उसे मांगने की जरुरत नहीं , भगवान् ही देने वाला है , उसने मुझे बोहोत कुछ दिया है , राजा सब कुछ पूछता है , तो वो बताता है के कल मुझे चांदी से भरा हुआ थाल मिला था और आज तरबूज में से हीरे जवाहरात यह सुन राजा दांग रह जाता है और उसी जगह धानु को बुलाता है और धानु से पूछता है के मैंने रास्ते में उस दिन चांदी का थाल रखा था तुम्हे वो क्यों नहीं मिला तो धानु कहता है , राजन उस दिन मैंने सोचा के मैं आज अँधा भिखारी बनता हूँ और आँखे बंद होने के कारण शायद वो मुझे दिखा नहीं होगा , राजा कहता है और कल मैंने तुम्हे जो तरबूज दिया था उसमे हीरे जवाहरात थे , तो वो कहता है राजन मैंने सोचा इस तरबूज से घरवालों का पेट नहीं भरेगा इसलिए मैंने इसे बेच दिया , राजा सब समझ जाता है , और आसमान की और दोनों हाथ करके जोर से कहता है , भगवान् देने वाला तू ही है , तेरी मर्जी के बिना इस दुनिया में किसी को कुछ नहीं मिल सकता , मैंने कितनी कोशिश की लेकिन धानु की किस्मत में वो सब नहीं था , लेकिन शानू को मैंने कुछ दिया भी नहीं लेकिन भगवान् आपने सब कुछ शानू को दे दिया , अब शानू भगवान् की जय जय कार कर रहा था और साथमे राजा भी लेकिन धानु का चेहरा उदास था।
Post By : Hanish Kumar Sharma
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this is not true man..???? bhagwan bas bato ma hi acha lagta ha
Bahut Badiya Sikh dene Vali kahani hai bhai
Keep it up....