Today's Poem || चलो आज वक्त के लिए वक्त निकालते है ....
Hello Steamians,
I hope you all are well and healthy.
Stay in your homes and be safe, enjoy your life.
A small effort of my friend through poem
चलो आज वक्त के लिए वक्त निकालते है......
ख्वाबों के आस्मां को अरमानों के तारों से गढ़ते है....
किस्मत के चांद को उम्मीदों से रोशन करते हैं.....
चलो आज वक्त के लिए वक्त निकालते हैं....
तेज रफ्तार सी भागती जिंदगी को विश्राम भी देना चाहिए.......
भागती उम्र को ठहराव भी देना चाहिए......
वो मिला... वो नही मिला... चाहे समान हो या इंसान ...
इस उलझन से भी बाहर निकलना चाहिए....
चलो आज वक्त के लिए वक्त निकालते हैं.....
भूत और भविष्य के मकड़जाल से वर्तमान को भी बाहर निकालते हैं...
पिता और पुत्र के मध्य जो मैं "स्वयं " हूं उसे भी कभी निहारते है .......
चलो आज वक्त के लिए वक्त निकालते हैं।
लम्हों से सदियों में बदलते वक्त को आज के लिए रखते हैं....
भुला दो आज सारे गमों को उड़ा दो सारी परेशानियों को धुएं की तरह.....
कुछ पल खुशियों के लिए भी चुनते हैं....
चलो आज वक्त के लिए वक्त निकालते हैं।।।
Enjoy the poem
I hope you like it.
Have a good day.
(A small effort from my friend)