A small effort through two touching poetry - कभी पत्थरों से भी पूछा है...
Hello Steamians,
I hope you all are well and healthy.
Stay in your homes and be safe, enjoy your life.
A small effort of my friend through Poetry
कभी पत्थरों से भी पूछा है
की क्या दर्द है तुम्हे....
रोज टूटते हो रोज़ तोड़े जाते हो........
कोई रोता है कभी तुम्हारे लिए...........
कभी कभी तो तराश कर भी कह दिया जाता है
की पत्थरों में भगवान कहाँ मिलते है....
जीवन की गहराई को समझने के लिए
कही ना कही इंसान भी अब पत्थर सा हो गया है.......
पता नही कहाँ उलझे अनसुलझे सवालों में खो गया है.......
रोज खुद को तराशने के लिए टूटता भी है और तोड़ा भी जाता है......
दर्द उसके दिल का कोई दूसरा अब कहाँ समझ पाता है....
अपने वजूद को जिंदा रखने के लिए पता नही कितनी बार मरता है......
अब तो खुद संवरने के बाद भी एक बुत सा नजर आता है....
क्या कहूं की अब पत्थर और इंसान भी एक से हो गए है
जिंदा होने के बाद भी कभी न खत्म होने वाली
अनंत एवम् अतृप्त वासनाओं में खो गए हैं।।।।
"चार आंसू......."
चार आंसू क्या निकले .....
दिल कुछ हल्का सा हो जाता है....
अपने दिल की दास्तान को बाहर आकर ही बता पाता है.....
कभी सोचा की कितना दर्द होगा इन आसुओं को भी पलक से जुदा होकर.....
वो खुद को खुद से जुदा कर खो जाते हैं.....
कुछ और हम जी लें ये सबब दे जाते हैं.....
पर इनको पढ़ने के लिए भी एक नजर की जरूरत होती है....
जो शायद खुद के लालच के लिए सोती दिखाई देती है....
मैं और मेरा की ओट में धुंधली हो जाती है.....
कभी तो ये मंजर हमे तोड़ना होगा.....
अपने स्वार्थ के लिए दूसरे के आंसू न निकले
Enjoy the poetry
I hope you like it.
Have a good day.
(मेरे मित्र का एक छोटा सा प्रयास)
You always write poetry and it always touched with my heart because the words that you write are relatable to the life. Nice poetry and sometimes we can convience to the people with our words, so the poetry is the best way to express your point.
#affable #india
Very nicely written by you.
Keep posting.
#affable