A small effort through touching poetry - "ख्वाब"
Hello Steamians,
I hope you all are well and healthy.
Stay in your homes and be safe, enjoy your life.
A small effort of my friend through Poetry
"ख्वाब"
ना जाने क्यों आज मन हुआ की ख्वाबों से बाते करते है....
कुछ कच्चे कुछ पक्के जिन्हे हम रोज देखा करते है......
कभी तो मन है कि चांद पर चला जाऊं.......
कभी मन है कि किसी चांद को पास ले आऊं.....
कभी सोचता हु कि कहीं दूर नदिया किनारे एक शाम हो....
ठंडी हवा के झोंके और एक सुखद अहसास साथ हो....
कभी हवा में उड़ने का मन है...
कभी प्रकृति में गुम होने की आरजू.....
ख्वाब तो ख्वाब है साहिब कन्हा मिल पाता है.....
आंख खुलते ही पराया सा हो जाता है......
हकीकत से रूबरू तो जिंदगी करती है.....
रोज़ मरते हैं रोज़ जीते हैं ये अहसास कराती है......
पर इस जीने और मरने के बीच जो एक खुशी की झलक है वो शायद ख्वाब ही है
अपने अरमानों का एक अहसास शायद एक ख्वाब ही है।।।।।।।।
मौत ....... एक प्रश्न ?????
अंत है .......... या आरंभ ????
कई उम्र पुराने बरगद की अत्यधिक उलझी जटाओं की तरह
मानव अपनी इच्छाओं और अतृप्त वासनाओं कि लंबी लताओं से निकल कर जब मृत्यु के आगोश में जाता है
आत्मा अपने नश्वर शरीर को त्याग ब्रह्मांड में विचरण को निकलती है तो लगता है कि अंत हो गया .......
किन्तु वास्तविकता है कि वो आत्मा गहन रात्रि के बाद उगते सूर्य की तरह अपना एक नया घर ढूंढती है
और एक नए शरीर में प्रवेश कर अपना आरंभ, प्रारंभ करती है।
प्रश्न का उत्तर ही प्रश्न है कि मृत्यु अंत है या आरंभ....
Enjoy the poetry
I hope you like it.
Have a good day.
(मेरे मित्र का एक छोटा सा प्रयास)
बहुत ही गहेराई है आप ओ कविता में बहुत अच्छा लिखा है आप ने @arvindkumar
मैं भी कभी कभी कुछ लिखती हूं, अभी तो बहुत समय से कुछ लिखी नहीं, अगर आपको पढ़ना पसंद है तो मेरी प्रोफाइल में आप को कविता मिलेगी आशा करती हूं आप को पसंद आये गे
एक ख्याब सच होते दिखाई देता है।