A small effort through 2 touching poems - लम्हों को सदियों में बदलते देखा है...
Hello Steamians,
I hope you all are well and healthy.
Stay in your homes and be safe, enjoy your life.
A small effort of my friend through Poetry
बदलती हुई तारीखों की अपनी कई कहानी है....
बचपन से जवानी और जवानी से बुढ़ापे की बहुत सी निशानी है.....
समुंदर की स्वछंद लहरों सा बचपन.....
अठखेलती उन्मुक्त नदी सी जवानी......
और ठहरा हुआ तलाब सा बुढ़ापा.....
बयां करते हैं अपनी अपनी कहानियां....
कभी एक दर्द की हूक सी उठती है कि बचपन ही अच्छा था......
पर अगर बचपन ही होता तो जवानी की मस्ती कन्हा होती....
और अगर केवल जवानी ही होती तो बुढ़ापे सा तजुर्बा कन्हा होता......
बस इसी पेशों पेश में फंस जाते हैं
बहुत कुछ पाने के लिए सब कुछ दे जाते हैं
खाली हाथ आते हैं और खाली हाथ चले जाते हैं।।।।।
लम्हों को सदियों में बदलते देखा है........
एक ख्वाब के लिए हर रात को हर सुबह से लड़ते देखा है.........
उड़ती पतंग सी है जिंदगी अपनी तो.............
खुद को दूसरों की उंगलियों पर नाचते को देखा है.....
वो हसीन शाम ही क्या जिसका कत्ल रात न करे.....
हर रात को सुबह के आगोश में सिमटते देखा है......
पहले तो मंजिल पाने के लिए राहों को ढूंढा बहुत मगर ....
मंजिलों तक पहुंच कर भी खुद को अकेले तन्हा खड़े देखा है......
वो दौर कुछ और था जब हंस लेते थे जी भरकर....
अब तो हंसी को भी जी भरकर रोते देखा है।।।।।
Enjoy the poetry
I hope you like it.
Have a good day.
(मेरे मित्र का एक छोटा सा प्रयास)
Very nice poem🥰
Keep posting
I liked your poem very much. I hope you keep posting like this
Have a good day