बीते लम्हे 😍
एक सफल आदमी एक दिन बैठे - बैठे अपने स्कूल और पुराने दोस्तों को याद करते हुए ज़िन्दगी से कहता है:-
ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे सब कुछ दिया लेकिन उन चीज़ों के लिए तूने मुझसे मेरी ज़िंदगी की सबसे अनमोल वस्तु छीन ली। मेरे पास सब कुछ होते हुए भी , कुछ नही है । मेरे दोस्त नही है,वो टपरी वाली चाय नही है , वो एक छोटे से टिफ़िन में बहुत सारे हाथ नही है, वो क्लास वाली पनिशमेंट नही है।आज जब वो टपरी की चाय , दोस्तो के साथ कि हुई मस्ती , वो क्लास के बाहर वाली पनिशमेंट , वो फिक्स्ड पॉइंट , वो होमवर्क न करने पर पड़ने वाली टीचर की डाँट और भी बहुत कुछ जब याद आता है तब आँखों मे बस खुशी के आँसु और पुरानी यादें होती है। पहले तो स्कूल में रोज़ लड़ते थे और अगले दिन फिर मिल जाते थे । कभी-कभी प्रिंसिपल से डाँट भी खाते थे लेकिन अगर आज लड़ाई हो जाए तो अगली सुबह कोर्ट के कटघरे में नज़र आते है । स्कूल में भी एक कटघरा हुआ करता था जहाँ हमारी सीख ही हमारी पनिशमेंट थी और एक कटघरा यह भी है जहाँ हमारी पनिशमेंट ही हमारी सीख है। स्कूल की एग्जाम में पन्ने ज़्यादा और शब्द कम थे फिर भी पास हो जाते थे और एक यह ज़िन्दगी की एग्जाम है जहाँ शब्द तो बहुत है लेकिन पन्ने कम है फिर भी हम फैल हो जाते है। आज इतने ऊँचे मुकाम पर पहुचने के बाद भी मुझे मेरा स्कूल और मेरे दोस्त बहुत याद आते है 
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